Tuesday, 6 September 2011

...तो इसलिए खाने के साथ फ्रुट्स कभी नहीं खाना चाहिए

 
 
शरीर का संपूर्ण विकास तभी होता है जब संतुलित भोजन के साथ ही प्रोटिन व विटामिन की अधिकता वाली चीजों का पर्याप्त सेवन किया जाए। इससे शरीर की प्रतिरोधक प्रणाली मजबूत होती है। साथ ही संपूर्ण आहार ही बेहद गम्भीर बीमारियों को रोकता है। विटामिन का सबसे अच्छा प्राकृतिक स्त्रोत फलों को माना जाता है।

कहते है जो पर्याप्त मात्रा में फल और सब्जियां लेता है उन्हें कभी हाइ ब्लड प्रैशर की शिकायत नहीं होती है। फलों और सब्जियां इसलिए फायदेमंद होती है क्योंकि इनमें ताकतवर एंटीऑक्सीडेंट, लेवोनाएड, विटामिन, मिनरल, फाइटो कैमिकल तथा अन्य बहुत से अत्यंत सूक्ष्म और संक्षिप्त रूप में मौजूद पोषक तत्वों का अनूठा मिश्रण होता है।

फल एक सबसे अनिवार्य घटक जो वजन कम करने में मदद करता है। लेकिन कुछ लोग भोजन के साथ फल खाते हैं जो कि आयुर्वेद के अनुसार सही नहीं माना गया है। इसका कारण यही है कि कार्बोहाइड्रेट और प्रोटींस के पाचन का मिकैनिज्म अलग होता है। कार्बोहाइड्रेट को पचानेवाला स्लाइवा एंजाइम एल्कलाइन मीडियम में काम करता है, जबकि नीबू, संतरा, अनन्नास आदि खट्टे फलों में एसिड ज्यादा होता है यानी ये फल ऐसीडिक होते हैं। दोनों को साथ खाया जाए तो कार्बोहाइड्रेट या स्टार्च की पाचन प्रक्रिया धीमी हो जाती है। इससे कब्ज, डायरिया या अपच हो सकती है। वैसे भी फलों के पाचन में सिर्फ  दो घंटे लगते हैं, जबकि खाने को पचने में चार-पांच घंटे लगते हैं। मेडिकल साइंस की राय कुछ और है। उसके मुताबिक, फ्रुट बाहर एसिडिक होते हैं लेकिन पेट में जाते ही एल्कलाइन हो जाते हैं। वैसे भी शरीर में जाकर सभी चीजें कार्बोहाइड्रेट, फैट, प्रोटीन आदि में बदल जाती हैं, इससे भोजन के पाचन की गति तो धीमा होती ही है साथ ही चरबी भी बढ़ती है।

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