Tuesday, 6 September 2011

कंपनियां बना रही कर्मचारियों का डाइट प्लान



काम की जल्दबाजी में ज्यादातर एक्जीक्यूटिव सुबह एकाध समोसा-कचौरी या थोड़ा-बहुत फास्ट फूड खाकर दिनभर काम करते रहते हैं। इस वजह से उन्हें अर्ली एज में ही कई तरह की स्वास्थ्य संबंधी परेशानी आने लगी हैं। इसे देखते हुए शहर की कंपनियां अपने एक्जीक्यूटिव्स का डाइट प्लान बनाकर उन्हें उसके अनुसार न्यूट्रीशियस फूड उपलब्ध करा रही हैं।

शहर में एक दर्जन ऐसी कापरेरेट कंपनियां हैं जो एम्प्लाइज के लिए हेल्दी डाइट प्लाट बनवा रही हैं। मनी मेकर कापरेरेट कंपनी हेल्थ को महत्व दे रही हैं ताकि उनका आउटपुट बेस्ट रहे। इंदौर में टेली कॉलिंग, आईटी व फार्मा कंपनियों में मैन पॉवर को हेल्दी बनाए रखने के लिए यह कोशिश की जा रही है।

कंपनियां चाहती हैं एक्जीक्यूटिव्स की डाइट प्रिफरेंस भले चेंज न हो लेकिन उन्हें न्यूट्रीशियस फूड मिले। कुछ कंपनियां इसके लिए कंसलटेंसी भी करा रही हैं। मेट्रोज में यह ट्रेंड सालों से है, जहां हर बड़ी कंपनी के अपने डाइटिशियन हैं। इंडस्ट्रीयल कैंटीन में एक काउंसलर रहता है, जो एक्जीक्यूटिव्स की डाइट मॉनिटर करता है।

शहर एवं आसपास के क्षेत्र की ज्यादातर कंपनियों में कार्यरत मैनेजर्स एंड एक्जीक्यूटिव्स यंग एज के हैं। काम की अधिकता के कारण खुद के लिए समय न मिल पाने, स्ट्रेस, सोशल प्रेशर, करियर व फैमिली रिस्पांसिबिलिटी बढ़ने के कारण वे अपनी हेल्थ के प्रति सचेत नहीं रहते।

पांच साल पहले जहां 40 की एज में बीपी, कोलेस्ट्रॉल बढ़ना, हार्ट अटैक जैसी परेशानी देखने को मिलती थी वह अब टीनएजर में भी देखने को मिल रही है। स्ट्रेस के कारण ब्रेन हेमरेज, ब्लडप्रेशर बढ़ना, अटैक की परेशानी देखने को मिल रही है। समय न मिलने से फास्ट व जंक फूड का सेवन बढ़ रहा है।

जरूरी है वर्क व लाइफ का बैलेंस
> रैनबेक्सी कंपनी के अनुपम तिवारी कहते हैं वर्क लाइफ बैलेंस रखना जरूरी है। वर्क प्रेशर के साथ इनटेक फूड भी उसी हिसाब से मिलना चाहिए। इसलिए हेल्दी डाइट प्लान जरूरी है। सॉफ्टवेयर कंपनी की एचआर मैनेजर दिप्ती शुक्ला बताती हैं हमारा 10 टू 10 सिटिंग जॉब है। कई लोगों को पीठ दर्द, ओबेसिटी, स्ट्रेस की परेशानी आती है। हम चाहते हैं वह सभी एम्प्लाइज का हेल्थ टेस्ट हो और सभी का हेल्थ डाइट प्लान बने।
> पी टूजी सॉल्यूशन के डायरेक्टर प्रशांत उपाध्याय कहते हैं आजकल यंग एक्जीक्यूटिव के पास समय नहीं। ब्रेकफास्ट में समोसा खाकर काम चला लेते हैं। फास्ट फूड भी आसानी से अवेलेबल है। खाने के बाद मूवमेंट नहीं होता। ऐसे में उनकी सेहत का ख्याल हमें ही रखना है। सभी के लिए हेल्थ डाइट प्लान जरूरी है।
> पोषण सलाहकार व रिसर्च स्कॉलर श्वेता केसवानी बताती हैं हमने कई कॉपरेरेट कंपनियों का सर्वे किया है। हमने पाया कर्मचारी छुट्टियां ज्यादा ले रहे हैं। हेल्थ प्राब्लम से कंपनी के टर्नओवर पर असर हो रहा है। केमिकल टेस्टिंग में कम एज के इम्प्लाइज का कोलेस्ट्रॉल व ब्लडप्रेशर बढ़ा पाया गया। उनकी कार्यक्षमता कम हो रही है।
> सीनियर लेवल के लोग पोस्ट लंच नींद व सुस्ती से परेशान हैं। बिफोर लंच वे ज्यादा काम कर लेते हैं लेकिन आफ्टर लंच काम नहीं होता क्योंकि डाइट उस तरह की नहीं मिलती। इसे देखते हुए कंपनियां हेल्दी डाइट प्लान तैयार करा रही है।

अभी यह स्थिति है कंपनियों में
> पोषण आहार विशेषज्ञों ने जब विभिन्न कंपनियों का सर्वे किया तो यह निकलकर सामने आया
> शहर की एक बड़ी फार्मा कंपनी में नमकीन की खपत 300 किलो है। वहां अधिकांश एम्प्लाइज नाश्ते में समोसा या कचौरी लेते हैं।
> कई कंपनियों में पोहा ब्रेकफास्ट में मंगाया जा रहा है लेकिन उसमें सेव की मात्रा ज्यादा होती है।
> बड़ी पोस्ट वाले लोग कोल्ड कॉफी, कोल्डड्रिंक लेते हैं।
> दाल में अरहर (तुअर) की दाल ही खाते हैं।
> जिन इंडस्ट्रीज में ज्यादा लोगों का खाना बनता है उनका खाना शादी-पार्टी की तरह बनता है। टेस्ट व खाने में तेल की मात्रा कर्मचारियों को ज्यादा चाहिए।

जबकि यह होना चाहिए
> नमकीन की जगह डिफरेंट चटनी, सेव में परमल की मात्रा ज्यादा, मूंगफली, चने या रोस्टेड नमकीन दे सकते हैं।
> कोल्ड काफी की बजाय छाछ, नीबू शिकंजी दी जा सकती है जो न्यूट्रीशियन के साथ डी-टॉक्सिफिकेशन भी करता है।
> दूसरी दाल भी प्रोटीन देती है। मूंग दाल में फाइबर व प्रोटीन ज्यादा होता है। मिक्स दाल की खिचड़ी दी जा सकती है।
> पनीर का पानी प्रोटीन ड्रिंक होता है जिसके पानी में नमक, काली मिर्च, भुना जीरा व पुदीना मिलाएं तो हाइली प्रोटीन मिलेगा।
> नाश्ते में सेंडविच व पराठे अच्छे हैं बजाय कचौरी, समोसे के। दाल का पराठा, आलू के सेंडविच बनाएं जो स्टफिंग रहेंगे। पराठे में गेहूं रहता है व आलू शेलो फ्राइड होता है जबकि समोसे में मैदा व तेल रहता है।
> नाश्ते में इडली सांभर बेस्ट व न्यूट्रीशियन से भरपूर हैं।
(आहार एवं पोषण विशेषज्ञ डॉ. मुनीरा हुसैन के अनुसार)

ऐसे बनता है हेल्दी डाइट प्लान
> कंपनियों में कर्मचारियों का लिपिड प्रोफाइल टेस्ट करते हैं, जिसमें बीपी, कोलेस्ट्रॉल, शुगर, गुड व बेड कोलेस्ट्रॉल चेक करते हैं। उनका वेट, हाइट व बीएमआई लेते हैं।
> सभी से सर्वे फार्म भरवाते हैं, जिसमें उनकी दिनचर्या, वॉक, कौन सी एक्सरसाइज करते हैं, जॉब कहां रुकावट बन रहा है, फैमिली हिस्ट्री आदि पूछते हैं।
> बेवरेज में डे व वीकली इनटेक क्या है। हार्ड ड्रिंक, डाइट कोला, कॉफी आदि। फास्ट फूड कौन सा लेते हैं, दाल, रोटी , सलाद व फल कितना लेते हैं देखा जाता है।
> 24 घंटे में कर्मचारी क्या खा रहा है उसकी कैलोरी व वेट के हिसाब से इनटेक है या नहीं। बीपी व कोलेस्ट्रॉल वाले क्या खाएं वह बता दिया जाता है।
> हर कर्मचारी की काउंसिलिंग होती है और मेल या बुकलेट के माध्यम से उन्हें एजुकेट किया जाता है कि वे क्या खाएं।

 

No comments:

Post a Comment